लेकिन आज तो हमारी भाषा ही खारी हो चली है जिन सरल, सजल शब्दों की धारों से वह मीठी बनती थी, उन धारों को बिलकुल नीरस, बनावटी, पर्यावारानीय, पारिस्थितिक जैसे शब्दों से बांधा जा रह है अपनी भाषा, अपने ही आँगन में विस्थापित हो रही है, वह अपने ही आँगन में परायी बन रही है
- अनुपम मिश्र
तरुण चंदेल
ज़िंदगी, सीख और टेक्नोलॉजी




3 comments:
चंदेल साहब,अच्छा लगा आपके ब्लाग पर कुछ पंक्तियां हिंदी की देख कर वरना मैं तो स्वयं को हाशिये से भी अलग पा रहा था, आशा है कि आप ऐसा ही उत्साह हिंदी के ब्लागरों के प्रति भी रखते हैं। प्रेम सहित......
it's ni-ras, not nee-ras. in a blog bemoaning the loss of hindi, it would be good to see correct Hindi spelling.
--> डॉ रूपेश जी अछा लगा आपको मेरे ब्लॉग पर पा कर| हिन्दी ब्लोग्गिंग की दुनिया में मैं अभी नया हूँ और सच बोलूं तो आसन नही है हिन्दी में ब्लॉग कर पाना| पर कोशिश मैं करता रहूंगा...
--> I still think it is नीरस| I think it will be really good to have a spell check for Hindi, it will make blogging in Hindi far more easy.
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